सोमवार, 1 सितंबर 2008

संत श्री त्रिकमसाहेब



संत श्री त्रिकमसाहेब रवि भान सप्रंदायके महान संत थे.उनका जन्म गुजरात के कच्छ जिल्ले के रापर तालुकाके रामवाव गाँवमें हुआ था .डॉ.बाबा साहेब ने जो लडाई दलितों-शोषितों ,के लिए लड़ी.और उन्हें कानूनी तोर पर सदा के लिए मुक्ति दिलाकर एक नए इतिहास की स्थापना की. इसी तरहसे आजसे ४०० साल पहले जातिके नाम पर हो रहे भेदभाव और शोषण के खिलाफ लडाई लड़ने वाले संत श्री त्रिकमसाहेब. ऐसे महान संत थे जिन्होंने अस्पुस्यता के उस युगमे अपनी महान प्रतिभा का परिचय अपने सद्कार्यों एवम परचा देकर दिया।डॉ।बाबा साहेब के समय में हालत अलग थे .इस लिए उनकी जंग के साधन अलग थे.पर ४०० साल पहले राजाशाहीके युग में परिस्तिथि बिल्कुल अलग ही होती थी .लोगो की सोच अवैग्ञानिक,अंधविश्वासी हुआ करती थी . शक्तिशाली समूह वर्ण व्यवस्था के नाम पर कमजोरों पर हकुमत चलता था.एसे समय में भी भारत में दलित समाजमे अनेक महान संतो ने जन्म लिया जिन्होने अस्पुस्यता,शोषण .अन्याय का अंत अपने आध्यात्मिक बल से किया ,


संत श्री त्रिकमसाहेब ऐसे ही संत थे.जिन्होंने उंच -नीच का भेद हटाया.लोगो को मानव धर्म सिखाया. यह उनका चमत्कार ही कह सकते हे की कट्टरवादी हिंदू वर्ण व्यवस्थामे माननेवाले उस वक्तमे उनके महा परिनिवार्ण के बाद उनकी समाधी सवर्ण समाजकी धरोहर माने जाते रवि भान सप्रंदायके रापर स्तिथ दरियास्थान में हे। जहा आजभी उनके गुरु देव संत श्री खिम साहेब जी की पूजा अर्चना बादमे की जाती हे.पहले संत श्री त्रिकम साहेबजी की पूजा अर्चना होती हे. दलित समाज आज भी अपने संत श्री त्रिकम साहेब की जिनका आश्रम चित्रोड़ के चित्राधार पर हे। और रापर केदरियास्थान जहाँ संत श्री त्रिकम साहेब ,उनके गुरु संत श्री खिम साहेब जी,सहित एनी संतो की समाधी हे. वहा उनके जन्मदिन जो गोकुल अष्टमी केदिन आता हे.एवं गुरु पुर्निमाके दिन बड़ी भारी संख्या में उपस्तिथ रह धामधूमपूर्वक मनाते हे,


गुजरात का दलित समाज संत श्री त्रिकम साहेबके साथ साथ ,उनके गुरु संत श्री खिम साहेब जी,और रवि भान सप्रंदायके सभी संतो को अपने इष्ट देव के रुपमे मानते हे.क्योकी रवि भान सप्रंदाय ही पहला ऐसा सप्रंदाय हे जिसने सही मायनेमे मानवधर्म को मानते दलितों को अपनाया.इस वक्त चित्रोड़ का आश्रम संत श्री त्रिकम साहेब नि जग्या विकास ट्रस्ट के द्वारा संचालित हे। जिसके मेनेजिंग ट्रस्टी श्री ऐ.के.पंड्या (एक्स.डी.आई.जी.)हे,

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